TEACHER IS NOT AN ACTOR BUT IS REACTOR


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टीचर : एक्टर नहीं, रिएक्टर
विद्यालय केवल किताबों का केंद्र नहीं होता, बल्कि वह व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला होता है। इस प्रयोगशाला में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शिक्षक की होती है। अक्सर लोग समझते हैं कि शिक्षक कक्षा में जाकर पढ़ाता है, समझाता है और बस उसका काम पूरा हो जाता है। लेकिन वास्तव में शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के विचार, भावनाओं और व्यवहार के प्रति संवेदनशील मार्गदर्शक होता है।
इसी संदर्भ में एक महत्वपूर्ण विचार सामने आता है — “टीचर एक्टर नहीं, रिएक्टर होता है।”
एक्टर मंच पर पहले से लिखी स्क्रिप्ट के अनुसार अभिनय करता है। उसका संवाद तय होता है, उसकी भूमिका तय होती है और उसका प्रदर्शन भी पूर्वनिर्धारित होता है। लेकिन शिक्षक का कार्य इससे बिल्कुल अलग होता है। शिक्षक किसी तय स्क्रिप्ट के अनुसार नहीं चलता। हर कक्षा, हर विद्यार्थी और हर परिस्थिति अलग होती है।
कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने साथ अलग-अलग अनुभव, जिज्ञासा, भावनाएँ और चुनौतियाँ लेकर आता है। कोई विद्यार्थी अत्यंत जिज्ञासु होता है, कोई संकोची होता है, कोई बहुत सक्रिय तो कोई शांत। ऐसे में शिक्षक को हर विद्यार्थी के स्वभाव और परिस्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया देनी पड़ती है। यही कारण है कि शिक्षक को रिएक्टर कहा गया है — वह विद्यार्थियों की जरूरतों, प्रश्नों और व्यवहार के अनुसार अपनी प्रतिक्रिया देता है।
एक संवेदनशील शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं रहता। वह विद्यार्थियों की जिज्ञासा को प्रोत्साहित करता है, उनकी गलतियों को सीखने का अवसर बनाता है और उनकी क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। कभी वह मार्गदर्शक बनता है, कभी मित्र, कभी प्रेरक और कभी अनुशासन का स्तंभ।
आज के बदलते समय में यह भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। तकनीक, सोशल मीडिया और तेज़ी से बदलती जीवनशैली के बीच बच्चों के सामने नई-नई चुनौतियाँ आ रही हैं। ऐसे में शिक्षक को केवल पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि बच्चों की सोच और दृष्टिकोण को सही दिशा देने वाला सजग मार्गदर्शक बनना पड़ता है।

हस्ती स्कूल का भी यही विश्वास है कि शिक्षा केवल अंकों की प्राप्ति तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो संवेदनशील, विचारशील और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। इस प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब शिक्षक बच्चों की जिज्ञासा को समझकर सही प्रतिक्रिया देता है, तब शिक्षा वास्तव में जीवन को आकार देने लगती है।
अंततः कहा जा सकता है कि
शिक्षक मंच का कलाकार नहीं, बल्कि भविष्य का निर्माता होता है।
वह अभिनय नहीं करता, बल्कि सही समय पर सही प्रतिक्रिया देकरविद्यार्थियों के जीवन को दिशा देता है।

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